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अखलासो मोहब्बत मेरा पैग़ाम है अफ़सर…

अखलासो मोहब्बत मेरा पैग़ाम है अफ़सर…
रिपोर्टर आमस (गया)
इखलासो मोहब्बत मेरा पैग़ाम है अफ़सर,
 शायर हूँ रफ़ाक़त के लिये भेजा गया हूँ..
कदम कदम पे मुसलसल सवाल करती है.
ये जिन्दगी जीना मुहाल करती है.
जैसे दर्जनों अशआर से महफिल देर रात तक गूंजती रही. मौका था हमज़ापुर में एक शाम अफ़सर हमज़ापुरी के नाम महफ़िल-ए-मुशायरा सह ग़ज़ल संग्रह बुक लॉन्चिंग का.
इस अवसर पर मशहूर शायर अफ़सर हमज़ापुरी मरहूम के अधूरे ग़ज़ल  संग्रह “रंग-ओ-अहंग” की लॉन्चिंग पूर्व मंत्री व स्थानीय जदयु विधायक डॉ विनोद प्रसाद यादव के हाथों किया गया.
 मुशायरे की अध्यक्षता 150 उर्दू किताबों के लेखक एवं  सूबे के मशहूर शायर नावक़ हमज़ापुरी ने किया. वहीं मंच का संचालन आफ़ताब राणा ने किया. मंच पर विराजमान शायरों ने अपने ग़ज़लों, नज्म़ो और तरन्नुम से दर्शकों और स्रोताओं का मन मोहते रहे.
पेश है मुशायरे में कहे गये कुछ अशआर
★ हुयी गुफ़्तगू जो मोहब्बत से पहले,
बहुत लुत्फ़ पाया सियासत से पहले
न ये हस्र होता, न बर्बाद होते मोहब्बत से पहले, 
अगर सोच लेते अदालत से पहले
✍इकबाल अख्तर ‘दिल’
★ मशहूरे जमाना इक सुखनवर न रहा,
मारूफ़ था आलम में सरासर न रहा,
हमलोग तो उर्दू के हैं नौकर चाकर 
हम में था इक शख्स अफसर न रहा. 
✍नावक हज़ापुरी
★ रिश्ता टूटे तो टूटने देना,
कोई छूटे तो छूटने देना,
लेकिन माँ के रूतबे टूटने मत देना
✍आफ़ताब राणा
शायरों में शामिल गया से आये नदीम जाफ़री, खालिद हुसैन ‘परदेशी’, प्रोफेसर अब्दुल मन्नान अंसारी, अतहर हुसैन व औरंगाबाद के आफ़ताब राणा, इक़बाल अख्तर ‘दिल’, नागेंद्र दुबे और स्थनीय शायर इमरान अली, इशराक हमज़ापुरी, रज़ा शेरघाटवी, मो0 सरवर, सय्यद मुर्तजा मो0 आफ़ताब एवं नैयर हमज़ापुरी ने भी अपने मज़ाहिया शायरी से श्रोताओं को देर रात तक तालियाँ बजाने व हंसी से लोटपोट होने पर मजबूर कर दिया. हालांकि खालिद हुसैन ‘परदेशी’ और अख्तर हुसैन ‘दिल’ पब्लिक डिमांड बने रहे.
आयोजन के अंत मे हमजा यूथ फोरम के सक्रिय सदस्य सरफ़राज़ अहमद द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया किया गया. ज्ञात हो कि उक्त मुशायरे का आयोजन हमजा युथ फोरम के बैनर तले किया गया. इस मौके पर आमस बीडीओ अरुण कुमार, एसएचओ डॉ रामबिलास प्रसाद, राजद ज़िला सचिव वसीम अकरम, हाजी ज़हीर अनवर, फ़िरोज़ अहमद, सय्यद मिनहाज, प्रोफेसर अरविंद कुमार, विमल कुमार, आबिद इमाम, सय्यद शाहनवाज़, मो0 फ़ैसल, एसके उल्लाह, ख़्वाजा असलम, असद, नसीमुद्दीन, डॉ एस रजाउल्लाह,अनवर हुसैन, मो0 अली, अब्दुल कादिर, नदीम अख्तर, बेलाल अहमद, शहबाज़ बैदावी, शहबाज़ अनवर, मो0 कलामुद्दीन, रूमान बदर, बदरुदोज़ा, मनव्वर हुसैन, नौखेज अकरम, ज़फ़र आलम, सय्यद शाहिद, शमशेर अली समेत सैंकड़ों लोग मौजूद रहे.