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उन्हें ईद पसन्द नहीं हमें होली पसन्द है

उन्हें ईद पसन्द नहीं हमें होली पसन्द है
उमर फारूक कासमी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगि आदित्यनाथ ने वहां के विधानसभा में खुल्लमखुल्ला कहा कि हमें हिन्दू होने पर गर्व है हम ईद नहीं मनाएँगे
इस बयान पर हमें कोई आपत्ति नहीं है। क्योंकि इस से यह तो पता चलता है कि वह अपने धर्म के प्रति ईमानदारी रखते हैं। वह हमारी टोपी पहन कर नमाज पढ़ कर हमें बेवकूफ़ तो नहीं बनाते हैं। लेकिन इस बयान में हमारे मुस्लिम राज्य नेताओं के लिए कोई सन्देश मोजूद है? जो होली, दीवाली, छठ खूब शौक से मनाते हैं। जब कि इनका मजहब इस्लाम इसकी अनुमति बिल्कुल नहीं देता। ऐसा करने वाले को शिर्क यानी मुर्ति पूजा मानता है। योगि जी पर हमें आपत्ति नहीं करना चाहिए क्योंकि वह अपने धर्म पर विश्वास के साथ साथ उस पर जमे हुए हैं। हिन्दुस्तान का संविधान किसी को दूसरे धर्म के रीति रिवाज पर अमल करने के लिए मजबूर नहीं करता है । लेकिन हम मुस्लिमों को भी अपने मजहबी सिद्धान्त पर उसी तरह जम जाना चाहिए जितना मान्य मुख्यमंत्री योगि आदित्यनाथ अपने धार्मिक सिद्धांत पर। लेकिन हम मुसलमानों का एक छोटा सा हिस्सा ही सही लेकिन होली, दीवाली, छठ मनाने, जय श्री राम का नारा, वंदेमातरम्, और हिन्दुस्तान जिन्दाबाद को छोड़कर भारत माता की जय लगाने में गर्व महसूस करता है बल्कि यहां तक कह देता है कि मैं राम की भी पूजा करता हूं और रहीम की भी। दोनों तरफ के लोग एक दूसरे को बेवकूफ़ बना रहे हैं कुछ मुस्लिम नेता होली का गुलाल लगाकर हिन्दूओं को बेवकूफ़ बनाते हैं और कुछ हिन्दू नेता ईदी टोपी और नमाज पढ़ कर मुस्लिमों को बेवकूफ़ बनाते हैं। मेरा मानना है है कि हिन्दू अगर हिन्दू हैं तो अपने धर्म का पालन करें और मुसलमान अगर मुस्लिम हैं तो अपने मजहब के सिद्धांत पर चलें। फिर भी एक दूसरे से मानवता वाला सुलूक करें। न तो वह मुस्लिम नाम रख कर हिन्दू वाला काम करें और न ही हिन्दू हिन्दू का नाम रख कर मुस्लिम वाला रिति रिवाज अपनाएं। और अगर ऐसा करने का शौक है तो या तो वह खुल्लमखुल्ला हिन्दू बन जाएं या खुल्लमखुल्ला मुसलमान