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उत्तर प्रदेश की सियासी बेवफाई और मियाँ अहमद

उत्तर प्रदेश की सियासी बेवफाई और मियाँ अहमद
अब्दुल गनी(पत्रकार)
एक समय मायावती ने अतीक अहमद पर शिकंजा कसते हुवे उन्हें गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया चूंकि वह नेता जी के करीबी और विश्वसनीय नेताओं में से एक थे और इलाहाबाद समेत पुरे उत्तर प्रदेश में अतीक अहमद की तूती बोलती थी बहन जी अपने रिवायती हरीफ मुलायम सिंह यादव और उस के तमाम खास लोगों को अपने राह का रोड़ा समझ कर हटाने का बल्कि उन का वजूद एक जरा भी बरदाशत नहीं था अतीक अहमद से उन को औरों से कहीं ज्यादा खोफ था उन की मकबूलयित से भयभीत भी इस लिये समाजवादी पार्टी को सत्ता से बे दखल कर के जैसी ही मायावती उत्तर प्रदेश के सिंहासन पर बैठीं उस ने राजनीतिक बदले की भावना से ग्रस्त होकर अपने हरीफों का पर काटने लगी उनकी कार्रवाई की जद में अतीक अहमद के एलावा मुस्लिम समाजवादी लीडर ज्यादा आऐ अतीक अहमद और उन के अहले खाना पर आक्रम तेवर में कार्रवाई शुरू कर दिया गया दर्जनों उलटे सीधे और झूटे मूटे केस लाद दिया गया जेल से ले कर कुर्की जब्ति सब होगया अती अहमद को मायावती ने सडक पर ला दिया आप को यह जानना चाहिये अतीक मायावती की दुशमन नहीं थी बल्कि नेता जी की वजह से अतीक को मायावती अपने स्वर्णम काल में टार्गेट करती रहीं यहाँ तक अतीक मन्जर नामे से गायब होगये मगर अवाम के लिये उन का “भाई” सब कुछ था और है इस बीच कई लोक सभा और विधान सभा के चुनाव हुवे मगर जिन के लिये अतीक खार हुवे बर्बाद हुवे उस ने भी आँखे फेरली फिर फाप बेटे की लड़ाई में अतीक भी पिसे गये अखिलेश ने विधान सभा की क्रारी हार के बाद ने नाक सीधी नहीं हुवी और अपनी अना की तसकीन और अतीक को नीचा दिखाने के लिये इलाहाबाद के फूल पूर लोक सभा उप चुनाव में अतीक के बजाए किसी और को टिकट थमा दिया और फूल पूर लोक सभा से सांसद रह चुके अतीक नजर अंदाज़ कर दिया जबकि अखिलेश यादव बी यह बात भली भाँति जानते हैं के फूल पूर लोक सभा के हर एक दिल में अतीक अहमद के लिये बे पनाह मोहब्बतें हैं अतीक भी कहाँ तक बरदाशत करते निर्दलीय उम्मीदवारी की घोषणा कर के जेल से ही चुनावी दंगल में खम ठोंक दिया है इस बीच एस पी और बी एस पी ने हवा की रुख देखते हुवे बर्सों पुरानी दुशमनी को भुला कर गलबहियाँ कर लिया है ताके अतीक अहमद कम बैक नही है हो सके और मियाँ अहमद जिंदगी बर जिस के लिये बहन जी से लडते रहे वह आज अतीक को छोड़ कर बहन की पल्लू में ठंठी आहें भर रहे हैं आप इसे मुस्लिम तुस्टीकरण भी कह सकते हैं!