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पटना में कब्रिस्तान की जमीन खरीद बेच करने वाले खालिद अनवर को विधान परिषद् प्रत्याशी बनाए जाने पर अल्पसंख्यकों में नाराजगीः बेदारी कारवां

पटना में कब्रिस्तान की जमीन खरीद बेच करने वाले खालिद अनवर को विधान परिषद् प्रत्याशी बनाए जाने पर अल्पसंख्यकों में नाराजगीः बेदारी कारवां

दीन बचाओ-देश बचाओ काॅन्फ्रेंस के बाद मौलाना वली रहमानी साहब के करीबी को नीतीश कुमार ने दिया तोहफाः नजरे आलम

पटना-16 अप्रैल, 2018-पटना के गांधी मैदान में आज दिनांक-15 अप्रैल, 2018 को इतिहासिक ‘‘दीन बचाओ-देश बचाओ काॅन्फ्रेंस’’ को बड़ी कामयाबी मिली है। इधर काॅन्फ्रेंस खत्म हुआ उधर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हजरत मौलाना वली रहमानी साहब के करीबी कहे जाने वाले और दिल्ली से लेकर पटना तक साथ रहने वाले खालिद अनवर जो पटना में कब्रिस्तान की जमीन खरीद बेच के इल्जाम से अभी बरी भी नहीं हुए थे कि दीन बचाओ देश बचाओ की कामयाबी का तोहफा नीतीश कुमार ने उन्हें विधान परिषद् प्रत्याशी बनाकर दिया। हांलांकि जनता का यह भी कहना है कि खालिद अनवर का समाजिक स्तर पर जनता से कोई लेना देना नहीं रहा है। लेकिन फिर भी नीतीश कुमार लगातार ऐसे व्यक्ति सबको अपनी पार्टी में जगह देते है जो सिर्फ खुदकी दुकानदारी चलाने में माहिर हैं, मुसलमानों का सौदा करने के माहिर हैं। मुसलमानों की अगर बात करें तो यह तल्ख हकीकत होगा कि नीतीश कुमार ने जिस किसी मुस्लिम लीडर को अपनी पार्टी में जगह दिया है या दे रहे हैं उससे मुस्लिम समाज का कोई तअल्लुक नहीं रहा है। यही वजह है कि उनके पास वोटर्स नहीं है खासकर मुस्लिम वोटर्स तो बिल्कुल नहीं के बराबर है। ऐसे में उन्होंने एकबार फिर बड़ी गलती की है चाहे वह मौलाना के दबाव में लिया गया फैसला हो या मौलाना को खुश करने के लिए लिया गया फैसला हो खालिद अनवर को विधान परिषद उम्मीदवार बनाने से मुसलमानों के बीच उन्हें कोई फायदा होने वाला नहीं है। कब्रिस्तान की जमीन खरीद बेच करने वाले खालिद अनवर से मुस्लिम समुदाय में काफी नाराजगी है पहले से ही। सरकार के मुखिया नीतीश कुमार को चाहिए कि इस फैसले पर पुनः विचार करें ताकि मुस्लिम समाज में जद यू0 का खोया हुआ वकार वापस लौट सके अगर ऐसा नहीं होता है तो आने वाले चुनाव तक ही अपना और पार्टी का सफाया भी तय ही समझें। यह सारी बातें आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के राष्ट्रीय अध्यक्ष नजरे आलम ने एक प्रेस ब्यान में कही। श्री आलम ने आगे कहा कि अब जनता इतनी मुर्ख नहीं रही हवा हवाई नेताओं और कायद को भीड़ का हिस्सा बन कर जनता समय पर जरूर साथ दे देती है लेकिन गलती की सजा भी उतनी ही समझदारी से देती है। किया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने पार्टी कार्यकर्ता और बिहार में समाजिक स्तर पर काम करने वाला कोई लीडर नहीं दिखा मुस्लिम सुमदाय में जिसका तअल्लुक समाजिक स्तर पर हो जिसे विधान परिषद् प्रत्याशी बनाया जाता। यकीनन अल्पसंख्यक समुदाय एक बार फिर खुदको ठगा हुआ महसूस कर रहा है और ऐसा लगने लगा है कि जद यू0 पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय से दूरी बनाती जा रही है और ऐसे लोगों को अपनी पार्टी में जगह दे रही है जिस का तअल्लुक कभी अल्पसख्ंयक समुदाय से नहीं रहा है और नहीं अल्पसंख्यक समुदाय की तरक्की और शिक्षा के बारे में सोचता हो। हां सिर्फ अपनी दुकानदारी चलाने वाले मुस्लिम नेता को ही नीतीश जी अपनी पार्टी में जगह दे रहे हैं जिसका परिणाम भुगतने को अगले चुनाव में तैयार रहें।