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दीन बचाओ देश बचाओ सम्मलेन ने रचा इतिहास, 10 लाख से अधिक मुसलमानो ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया

दीन बचाओ  देश बचाओ सम्मलेन ने रचा इतिहास,  10 लाख से अधिक मुसलमानो ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया
अशरफ अस्थानवी 
ईमारत-ए-शरिया पटना के तत्वाधान में अमीर-ए-शरीयत हज़रत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी की पुकार पर पटना के गाँधी मैदान में आयोजित होने वाला दीन बचाओ  देश बचाओ महा सम्मलेन ने एक इतिहास रचा पहली बार पंथीय मतभेद भुला कर कलमा ए वहदत की बुनियाद पर देश और राज्य के कोने कोने से 8 लाख से अधिक मुसलमानो ने एकजुट होकर अपनी एकता का परिचय दिया  ‘दीन बचाओ, देश बचाओ’ कॉन्फ्रेंस में दस सूत्रीय प्रस्ताव पारित किये गये. इन प्रस्तावों में शरीयत की पवित्रता बनाए रखने, हाल ही में लाये गये बिलों खासतौर पर मुस्लिम वोमेंस (प्रोटेक्क्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज ) बिल 2017 को वापस लेने  की बात कही.
 काॅन्फ्रेंस में कहा गया कि इस बिल के जरिए शरीयत में सरकार के हस्तक्षेप का नया दरवाजा खोल दिया है. यह निंदनीय है.इसके अलावा काॅन्फ्रेंस में पेश किए गए  दस सूत्रीय प्रस्तावों में महिला सुरक्षा, उर्दू भाषा का संरक्षण, दलित उत्पीड़न का विरोध,मस्जिद, मकबरों, मदरसों की सुरक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता  बनाए रखने आदि  विषयों को शामिल किया गया.  इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से तमाम मुस्लिम रहनुमाओं को भी एक मंच पर आने की अपील की गयी.
  कॉन्फ्रेंस को भले ही गैर राजनीतिक कार्यक्रम होने का दावा किया गया हो, परंतु पूरे कार्यक्रम पर नजर डालें तो इशारा केंद्र सरकार पर था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को लेकर अधिकतर वक्ताओं ने कड़ा रुख अख्तियार किया. तीन तलाक का मुद्दा रहा हो या उन्नाव और जम्मू रेप कांड. सरकार को घेरने की कोशिश की गयी. रही सही कसर वामसेफ के अध्यक्ष वामन मेश्राम ने पूरी कर दी. उन्होंने भाजपा ही नहीं, कांग्रेस, तृणमूल, सीपीआई, सीपीएम तक के संस्थापकों के बहाने ब्राह्मणों और ऊंची जातियों को कटघरे में खड़ा किया. इमारत-ए-शरीया के मंच पर वामन मेश्राम की उपस्थिति यह साफ बयां करती कि एससी, एसटी और ओबीसी को मरहम लगाना ही मकसद है. मंच से मुसलमानों और एससी, एसटी और ओबीसी से ताल्लुक रखने वालों को एकजुट होने का आह्वान किया गया ताकि भाजपा का सामना किया जा सके. साफ है कि वर्ष 2019 में चुनाव है, जिसकी भूमिका अभी से तैयार होने लगी है.
GANDHI MAIDAN ME DEEN BACHAO DESH BACHO CONFRENCE ME WAMEN MISHRAM, MAULANMD WALI RAHMANI, AMULANA ASGAR ALI IMAM SALFI, MAULANA ABU TALIB RAHMANI,MAULANA UMREEN RAHMANIAND MAULANA ANISURRHAMAN
 कॉन्फ्रेंस में मुस्लिम उलेमाओं ने कहा कि हमारी शरीअत हमारी जान है. इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ हम बर्दाश्त नहीं करेंगे. मांग की गयी की सरकार अपने रवैये में बदलाव करे और कुरान व हदीस की पवित्रता को बने रहने दें. महिलाओं की सुरक्षा के नाम से बनने वाले बिल को वापस लें. गणतंत्र का वजूद हमारे न्यायालयों की आजादी और सम्मान पर आधारित है. आज सरकारी स्तर पर न्यायालयों को लगातार प्रभावित करने का प्रयास हो रहा है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के चार सीनियर जजों ने जिस तरह संवैधानिक संस्थाओं को बर्बाद करने के प्रयास के विरुद्ध प्रेस काॅन्फ्रेंस की और गणतंत्र को पेश आने वाले खतरों से देश को खबरदार किया वह न्यायालयों की सही हालत समझने के लिए पर्याप्त है.
मस्जिदें हमारे धर्म और शरीयत का केंद्र और मदरसे दीन के किले हैं. हमारी संस्कृति की पहचान हैं. हमारी दरगाहें और खानकाहें आम जनता के रूहानी मर्कज हैं. पिछले कुछ सालों से हमारे इन स्थानों के बारे में लगातार षड्यंत्र हो रहे हैं. मदरसों को आतंकवाद से जोड़ कर निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है. खानकाहों एवं शैक्षणिक संस्थाओं को तोड़ा जा रहा है. सरकार मस्जिदों, मकबरों, कब्रिस्तानों एवं मदरसों की सुरक्षा सुनिश्चित करे. सांप्रदायिक दंगों ने हमारे समाज को तोड़ दिया है. स्वतंत्रता के बाद से आज तक यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. केंद्र में जब से नयी सरकार आयी है दंगाइयों के हौसले बढ़ गये हैं. मुसलमानों, दलितों और कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. इबादतगाहों पर हमले किये जा रहे हैं. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की आबादी बहुत बेचैनी में है. दलितों पर जुल्म आम बात हो गयी है. एससीएसटी एक्ट का गला घोंट दिया गया है. आज की यह काॅन्फ्रेंस देश में बसने वाले सभी दलित भाइयों से हमदर्दी जाहिर करते हुए सरकार से मांग करती है कि वह दलितों एवं शोषित वर्ग के लोगों पर जुल्म करने वाले के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई करे.
विभिन्न कारणों से पारिवारिक प्रणाली टूट रही है. दीनी मामलों में भी मुसलमान कमजोर हो रहे हैं, धार्मिक शिक्षा एवं समझ की कमी पायी जाती है. इसलिए आवश्यकता है कि मुसलमान दीन बचाने के लिये अपने निजी एवं घरेलू जीवन में भी जिम्मेदार हों. महिला जागरूकता अभियान चलाया जाये. इसके लिए राज्य स्तर से लेकर जिला एवं ब्लॉक स्तर तक पढी लिखी महिलाओं की कमेटी बनायी जाये. इन्हें कानून और धर्म के बारे में बताया जाये. इमारत-ए-शरीया के मरकजी दफ्तर को भी इसकी सूचना दी जाये.
 
 मुसलमानों के लिए इस्लाम की बुनियादी शिक्षा करना अनिवार्य है. इस लिए लड़कों एवं लड़कियों को ऐसी जगह शिक्षा दिलवायी जाये, जहां बुनियादी दीनी तालीम प्राप्त करना संभव हो. इस बात को सुनिश्चित किया जाये कि मॉडर्न शिक्षा दीनी तरबियत के साथ इस्लामी माहौल में बच्चों को दी जाये. ऐसे बच्चे जिन के शैक्षणिक संस्थाओं में दीनी तालीम की व्यवस्था न हो, उनके लिए विभिन्न छुट्टियों में वोकेशनल एवं सीजनल कोर्स चलाये जायें.
सरकारी स्तर पर सरकार अपने हिसाब से उर्दू के विकास एवं पदोन्नति के लिए और भाषा होने की हैसियत से उसको विकसित करने के लिए प्रयासरत है, लेकिन उर्दू भाषा को घर-घर दाखिल किये बिना उसको जीवित भाषा के रूप में बाकी रखना मुश्किल है. इसलिए आवश्यक है कि घर-घर में उर्दू लिखी पढ़ी एवं बोली जाये.
औकाफ बहुत ही दयनीय स्थिति में हैं. सर्वे का काम मुकम्मल न होने से औकाफ की जायदाद तेजी से खुर्द-बुर्द हो रही है. उन पर जमीन माफिया का कब्जा है. सरकार को चाहिए कि वह सर्वे के काम को शीघ्र मुकम्मल कराये. वैश्विक स्तर पर म्यांमार, सीरिया और फिलिस्तीन के मुसलमानों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. यहां शांति स्थापित करने के लिए प्रयास होने चाहिए. रैली में शामिल होने के लिए आने वालों में महिलाएं भी शामिल दिखीं. इनमें से ज्यादातर हिजाब में थीं. पुरूषों की तुलना में इनकी संख्या काफी कम रही.
रैली में आने वाले लोगों के बीच बेहतर अनुशासन दिखा. ज्यादातर लोग सड़क किनारे कतारबद्ध होकर आ जा रहे थे. कई जगह हरी जैकट पहने वालंटियर्स उन्हें पंक्तियों   में कतारबद्ध होने की अपील कर रहे थे. इसके कारण भारी मात्रा में  लोगों के आनेजाने के बावजूद भी कहीं जाम या अफरातफरी की स्थिति नहीं दिखी.  बाहर से रैली में आने वाले बसों के पार्किंग की व्यवस्था न्यू बाईपास के ही किनारे की गई थी. इसकी वजह से लोग वहां उतरकर पैदल ही  गांधी मैदान आ रहे थे. न्यू बाईपास से कंकड़बाग मेन रोड होते हुए चिरैयाटांड़ और एक्जीबिशन रोड तक सड़क के दोनों तरफ आते जाते लोगों का रेला दिखा.
रैली में आये कई लोग अपने हाथें में तिरंगा लिये हुए थे. गांधी मैदान सर्किल में कई जगह एक साथ कई लोग तिरंगा हाथ में लिए भी दिखे, जो दूर से देखने में बहुत अच्छा लग रहा था. कई लोग बाइक के पीछे बैठ कर भी तिरंगा लहराते हुए चल रहे थे.  महाराष्ट्र के मालेगांव से आये मौलाना महफूर उमरैन महफूज रहमानी ने कहा कि केंद्र सरकार छेड़े न. नहीं तो मुश्किल में पड़ जायेगी. फूलपुर, अररिया और गोरखपुर की जनता ने केंद्र सरकार को ‘तीन तलाक’ दिया है.
 कार्यक्रम का उद्घाटन अमीर-ए- शरीयत, इमारत-ए-शरिया बिहार,ओडिशा, झारखंड व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने किया. मौलाना रहमानी ने कहा कि सबसे कीमती दौलत दीन और ईमान है. अल्ला की शरीयत नहीं बदलेगी, सरकारें बदलती रहती हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो वादे किये वह हवा हो गये. करप्शन फ्री इंडिया, हर खाते में 15 लाख रुपये आयेंगे आदि बातों को याद कर लिया जाये तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाता है.  सबका साथ, सबका विकास का नारा दिया गया था, अब पोल खुल गयी है. उन्नाव और जम्मू रेपकांड सरकार की हकीकत बयां करता है. इसलिए आप अपनी औलाद की खुद हिफाजत करिए. मौलाना ने कालाधन मामले में एक सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि काला धन वापस आयेगा, परंतु सफेद धन भी बाहर जाने लगा है.