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देश का तनावपूर्ण  वातावरण, मस्जिदों पर अवैध क़ब्ज़े  और नमाज़ विवाद 

देश का तनावपूर्ण  वातावरण, मस्जिदों पर अवैध क़ब्ज़े  और नमाज़ विवाद 
अशरफ अस्थानवी
पुरे देश का वातावरण प्रदूषित है धर्म के नाम पर वोट पोलराइजेशन की सियसत जारी है, कर्नाटक विधान सभा चुनाव बी जे पी हर हाल में जीतना चाहती है वहाँ 12 मई को चुनाव होने हैं आज यहाँ चुनाव प्रचार समाप्त हो गया , नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी की प्रतिष्टा दाव पर लगी है इसी बीच हरयाणा के गुरु ग्राम में जारी नमाज़ विवाद के बीच हरयाणा वक़्फ़ बोर्ड ने गुरु ग्राम की उन 19 मस्जिदों की सूचि राज्य सरकार को समर्पित की है जिनपर या तो अवैध कब्ज़े हैं या उन में नमाज़ों की आदायेगी नहीं हो पा रही है कियुंके इन मस्जिदों में लोग अज़ान और नमाज़ का विरोध कर रहें है वक़्फ़ बोर्ड ने सरकार से मांग की है की उन मस्जिदों को अवैध क़ब्ज़ों से यथाशीघ्र मुक्त कराकर नमज़िओ को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी जाये 

देश की राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम में सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ पढ़ने के ख़िलाफ़ हिन्दूवादी संगठनों की मुहिम और मोर्चेबंदी पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ‘सरकारी मुहर’ के बाद उनके विवाद-प्रिय मंत्री अनिल विज का ताजा बयान विवाद के कई दूसरे दरवाज़े खोलता है। अनिल विज ने कहा है कि ज़मीन कब्ज़ा करने की नीयत से नमाज़ पढ़ने की इजाज़त नहीं दी जा सकती है।
मुख्यमंत्री खट्टर पहले ही कह चुके हैं कि जिन्हें नमाज़ पढ़नी हो, वो मस्जिद , ईदगाह या अपने घरों में पढ़ें, सार्वजनिक जगहों पर इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती। हरियाणा के मुख्यमंत्री के बयानों से भी कई सवाल पैदा होते हैं।
सवाल ये है कि क्या दूसरे धर्मों के लिए भी यही पैमाने बनाए जाएंगे ? क्या दूसरे धार्मिक उत्सवों, पूजा पंडालों, कार्यक्रमों, यात्राओं, जुलूसों, अखंड पाठों, कांवड़ियों, जगरातों या जागरणों के लिए भी यही क़ायदा काम करेगा ? क्या एक जैसे नियम सबके लिए लागू होंगे ? क्या इन सबके लिए भी नमाज़ियों की तरह ही कोई विधान बनेगा ? अगर खट्टर सरकार सभी धर्मों के लिए कोई गाइडलाइन या अधिसूचना जारी करती तो बात समझ में आती , लेकिन ऐसा है नहीं है। तो क्यों न माना जाए कि इरादे ‘नमाज़ियों’ के ख़िलाफ़ हैं, निशाने पर मुसलमान हैं।
सुप्रीम कोर्ट और कई राज्यों के हाईकोर्ट ने समय-समय पर केन्द्र और राज्य सरकारों को ऐसी क़ब्ज़े वाली सरकारी ज़मीनों को मुक्त कराने का फ़रमान जारी किया है, लेकिन उस पर अमल न के बराबर हुआ है। राज्य सरकारों की लापरवाही और नाकामी पर चोट करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा कि ‘ क़ब्ज़े वाली ज़मीन पर मंदिर बनाना भगवान का अपमान है। किसी भी सूरत में इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती। आप सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को कोल्ड स्टोरेज में नहीं रख सकते।’ सुप्रीम कोर्ट के इतने सख्त निर्देश के बाद भी सरकारी ज़मीनों पर बने मंदिरों ,मस्जिदों या मजारों पर बुलडोजर चलाकर उसे खाली कराने का काम किसी राज्य सरकार ने अभी तक नहीं किया है।
तो जब पूरे देश में ये हाल है ,कि सुप्रीम कोर्ट तक लाचार है, फिर अनिल विज को अचानक गुरुग्राम के नमाज़ियों से ही खतरा क्यों दिखने लगा ? वजह साफ है। समझिए तो समझ जाएंगे। एक धर्म विशेष के ख़िलाफ़ ये तीली है , जब आग बनेगी तो सेंकने में फायदे ही फायदे हैं। इस बात को तो खट्टर से लेकर विज तक और दिल्ली में बैठे बीजेपी के नेता तक समझते हैं। वरना अगर सरकारी ज़मीनों पर धार्मिक क़ब्ज़े की चिंता होती तो हिन्दू -मुसलमान,सब बराबर होते।

ऐसे में भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों का नैतिक कर्तव् है की संविधान में प्राप्त मौलिक अधिकारों को लोगों तक पहुँचाने में सहयोग करें ताकि देश में रहने वाले हर धर्म और वर्ग के लोगों को संविधान की अनुरूप अधिकार प्राप्त होते रहें …