Headlines

जोकीहाट विधानसभा चुनाव नीतीश के लिए प्रतिष्ठा का विषय, सभी दलों ने झोंकी अपनी ताकत, 28 मई को होने हैं चुनाव 

जोकीहाट विधानसभा चुनाव नीतीश के लिए प्रतिष्ठा का विषय, सभी दलों ने झोंकी अपनी ताकत, 28 मई को होने हैं चुनाव 

अशरफ अस्थानवी 

बिहार  के अल्पसंख्यक बहुल्य अरेरया जिला के जोकीहाट विधानसभा उप चुनाव  सभी पार्टियों के लिया प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है आज राज्य के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने जोकीहाट विधान सभा क्षेत्र के जदयू प्रतियाशी के पक्ष में तूफानी दौरा किया उन्होंने ने कहा कि उनकी सरकार ने बिना भेद भाव के हर वर्ग और सम्प्रदाय के लिए सामान रूप से काम किया है,  हमने हर समुदाय का विकास किया है, हम बुनियादी जरूरतों पर काम कर रहें हैं। राजद के नेता तेजस्वी यादव भी कल से दो दिन के तूफानी दौरे पर जोकीहाट पहुंच कर विभिन्न स्थानों पर चुनावी सभा करेंगे  विदित हो कि आगामी 28 मई को उक्त क्षेत्र में उप चुनाव होना है

बिहार में जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव सभी पार्टियों के लिए नाक का सवाल बन गया है। सभी पार्टियां चुनाव जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। कई मंत्री, सांसद इन दिनों जोकीहाट के गांव की गलियों में घूम रहे हैं। राजद के पूर्व मंत्री अली अशरफ फातमी, अररिया के राजद सांसद सरफराज आलम नरपतगंज के राजद विधायक अनिल यादव हो या फिर प्रदेश राजद अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे सभी धूप से बेपरवाह होकर जनता से रूबरू हो रहे हैं। जोकीहाट का यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यहां से तस्लीमुद्दीन और उनके पुत्र व वर्तमान सांसद सरफराज आलम ने 9 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। क्षेत्र में इस परिवार का एक खास दबदबा है।

गौरतलब है कि जोकीहाट सीट से पहले सरफराज ही विधायक थे। सरफराज के पिता तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद वे अररिया से सांसद बने। इसके बाद जोकीहाट विधानसभा सीट खाली हो गई थी। इस दबदबा को तोड़ने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन मंत्री, बिजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व सांसद प्रदीप कुमार सिंह, पूर्व विधायक जनार्दन यादव, आनंदी प्रसाद यादव, प्रदीप दास सहित दर्जनों नेता जदयू प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन मांगने के लिए गांव-गांव जा रहे हैं।

अररिया के सांसद सरफराज आलम जदयू से ही जोकीहाट के विधायक थे। उन्होंने विधायकी से इस्तीफा देकर राजद के टिकट पर लोकसभा उपचुनाव लड़ा और कामयाबी मिली। सांसद के छोटे भाई शाहनवाज आलम राजद के टिकट पर विधान सभा उपचुनाव लड़ रहे हैं। यह सीट इसलिए भी महत्वपूर्ण समझी जाती है क्योंकि मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र से जो परिणाम आएगा उसका असर आने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा।

जोकीहाट समेत पूरे सीमांचल को आरजेडी के पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन का गढ़ माना जाता था। तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद आरजेडी ने उनके छोटे बेटे शाहनवाज आलम को उम्मीदवार बनाया है। उनके सामने जेडीयू प्रत्याशी मुर्शीद आलम हैं। दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के बीच पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के गौसुल आजम मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों की कोशिशों ने भी चुनाव को और रोमांचक बना दिया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए ये चुनाव नाक का सवाल बन गया है। ये सीट जेडीयू के कब्जे में ही थी। माना जा रहा है कि इस चुनाव से 2019 लोकसभा चुनाव के रुख भी पता चलेगा। महागठबंधन से अलग होने के बाद जेडीयू और आरजेडी में ये दूसरा मुकाबला होगा। जहानाबाद में उपचुनाव में जेडीयू को हार का सामना करना पड़ा था।