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उफ्फ ये सियासी इफ्तार पार्टियां !

उफ्फ ये सियासी इफ्तार पार्टियां !

अशरफ अस्थानवी।
रमजान का पावन और पवित्र महीना अब समाप्त होने को है। पुरे महीने को 3 भागों में बांटा गया है, पहला भाग रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा भाग जो अब अंतिम चरण में है अर्थात नार ए जहन्नम से मुक्ति का भाग है, चुनावी वर्ष होने के कारण इस वर्ष सियासी इफ्तार पार्टियां कुछ अधिक हुई हैं। सियासी पार्टयों की इफ्तार पार्टयों में सम्मलित होने से रोजा खराब हो जाता है.
सबको पता है कि रमजान के दौरान किसी भी सियासी दल के राजनेताओं द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टियों का उद्देश्य जनकल्याण या वंचितों की पीड़ा में उनकी सहभागिता नहीं होती है। इनका मकसद शुद्ध राजनीतिक होता है। इन बड़ी-बड़ी इफ्तार पार्टियों में शायद ही किसी नेता की हलाल की कमाई के पैसे लगे होते हैं। उनमें या तो रिश्वत और घोटालों के पैसे लगते हैं या उन्हें खुश करने के लिए उनके दलाल और बड़े-बड़े ठीकेदार इन आयोजनों में अपनी पूंजी लगाते हैं। रोजे का उद्धेश्य आत्मशुद्धि के अलावा अभावग्रस्त लोगों की भूख और प्यास का अहसास करना भी है। रोजे में अगर आप कभी बड़ी इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं तो उसमें उन लोगों की हिस्सेदारी होनी चाहिए जिनके पास इफ्तार के लिए साधन का अभाव है। हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम का कथन है – श्सबसे बेहतरीन दावत वह है जिसमे गरीबों को शामिल किया जाए।श् दुखद है कि पिछले कुछ दशकों से राजनेताओं द्वारा इफ्तार पार्टियों के आयोजन अपने वैभव के प्रदर्शन और मुस्लिम वोट बैंक को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए किए जाने लगे हैं। क्या किसी सच्चे रोजेदार मुसलमान का हराम के पैसे और धर्म से इतर मकसद के लिए आयोजित ऐसी इफ्तार पार्टियों में शामिल होना रमजान के पवित्र उद्देश्य से भटकाव और इसीलिए हराम नहीं है ? अखबारों, पत्रिकाओं और मीडिया में ऐसी इफ्तार पार्टियों की तस्वीरें देखकर क्या आपको वितृष्णा नहीं होती है ? गरीबों का मजाक उड़ाने जैसी इन शानदार इफ्तार पार्टियों में सजधज कर भक्ति-भाव से पहुंचने वाले रोजेदार क्या सचमुच अपने मजहब के पवित्र उद्देश्यों का मखौल नहीं उड़ा रहे होते हैं ? ऐसे में हमें इस्लाम धर्म के मूल्य उद्देशों पर ध्यान देना होगा और सुनिश्चित करना होगा के रोजा जैसे पवित्र धार्मिक कार्य खराब न हो,
रोजा सिर्फ भूके प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्के आत्मा की शुद्धि का नाम है रोजा के दौरान कोई ऐसे अनैतिक कार्य न हों जिस से रोजा खराब हो इस पर भी ध्यान देने की नितांत आवश्यकता है।