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बिहार के 51 प्रखंडों को बाल श्रम मुक्‍त करने के लिए रणनीति और दिशानिर्देश तैयार

बिहार के 51 प्रखंडों को बाल श्रम मुक्‍त करने के लिए रणनीति और दिशानिर्देश तैयार

प्रेस विज्ञप्ति

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर श्रम संसाधन विभाग के द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से परामर्शी कार्यशाला का आयोजन
पटनाए 12 जूनए 2018
सभी बच्‍चों को सुरक्षित और बेहतर बचपन देना उनके विकास के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण है। बिहार सरकारए राज्‍य को बाल श्रम मुक्‍त कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्‍य के 38 जिलों के 51 चयनित प्रखंडों को बाल श्रम मुक्‍त करने की यह पहल स्‍वागत योग्‍य है। हम जल्‍द ही पूरे राज्‍य को बाल श्रम मुक्‍त करवाने की दिशा में कार्य करेंगें। उक्‍त उदगार श्रीविजय कुमार सिन्हा माननीय मंत्री श्रम संसाधन विभागए बिहार सरकार ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर व्‍यक्‍त किया।
बाल मजदूरी के प्रति विरोध एवं जगरूकता फैलाने के मकसद से हर साल 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। आज बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर श्रम संसाधन विभाग के द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से बाल संरक्षण से जुडें संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों और बाल श्रम उन्‍मूलन और पुर्नवास के क्षेत्र में कार्य करे रहे संगठनों के साथ परामर्शी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में 51 चयनित प्रखंडों को बाल श्रम मुक्‍त करने के लिए रणनीति और दिशानिर्देश को अंतिम रूप देना था।
श्रम संसाधन विभाग के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार सिंहने कहा कि हमें बाल मजदूरों के रोकथाम’ के प्रयासोंश् और श्पुनर्वास प्रक्रियाश् के बीच अंतर करने की जरूरत है। उन्होंने अंतर विभागीय समावेशन पर जोर दिया और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से सहयोग के साथ ही समाज कल्याण विभागए शिक्षा विभागए गृह ;पुलिसद्धए ग्रामीण विकास विभागए पंचायती राज विभाग और एससी.एसटी कल्याण विभाग को सम्‍मिलित रूप से इन 51 प्रखंडों पर बाल श्रम से मुक्‍ति हेतु ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रखंड और पंचायत स्तर पर नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए सभी संबंधित विभागों को उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। सभी संबंधित विभागों के माध्यम से एक बार 51 प्रखंड़ों को बाल श्रम मुक्त करने की योजना को अंतिम रूप देने के बाद मुख्य सचिवए बिहार की अध्यक्षता में स्‍टेट टास्‍क फोर्स और उच्‍च्‍तम स्‍तर से भी आवश्यक सहमति ली जाएगी।
श्रम संसाधन विभाग के श्रम आयुक्त श्रीगोपाल मीणा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि जनगणना के आंकड़ों के अनुसारए बिहार में बाल श्रम के उच्‍च संख्‍या वाले जिलों में से 13 जिलों में 30ए 000 से अधिक बाल श्रमिक हैं जो राज्य के कुल बाल श्रमिकों में से लगभग 55ः हैं। इनमें से बाल श्रम की अधिकता वाले प्रखंडों ;13 जिलों में 2 और शेष 25 जिलों में से 1द्ध की पहचान करके चरणबद्ध तरीके से राज्य कार्य योजना के अनुसार बालश्रम विमुक्‍ति एवं पुनवास का काय किया जाएगा।
पंचायती राज विभाग के निदेशक श्री कुलदीप नारायण ने सभी 51 प्रखंडों के जिला पंचायती राज्‍य पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी के प्रशिक्षण के साथ ही राज्य और जिलों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और पंचायत सचिवों के प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने वार्ड ध्पंचायत स्तर पर श्बाल पंजीश् और स्कूलों में इसी प्रकार के रजिस्टरों के विकास पर जोर दिया।
यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ श्रीमंसूर कादरी ने कहा एक सक्षम माहौल बनाने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है जहां बच्चे आजीविका के साधन के रूप में श्रम करने के बजाए स्कूल जाएं। लंबे समय तक बाल श्रम का बच्चों पर प्रतिकूल मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है और उनका गरीबी के चक्र से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और अंततः इसका प्रभाव उनके विकास पर पड़ता है। बिहार में बाल श्रम उन्मूलन के लिए यूनिसेफए श्रम संसाधन विभाग के साथ काफी लंबे समय से काम कर रहा है।
समाज कल्याण विभाग के निदेशक श्री राज कुमार ने कहा कि पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण समिति का गठन एवं समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सेव द चिल्ड्रेन के प्रोग्राम मैनेजरए श्री राफे हुसैन ने कहा कि इस तरह की एक योजना की आवश्यकता हैए लेकिन बाल श्रम जैसे गंभीर मुद्दों को संबोधित करने में इससे जुडें कार्यक्रमों में एक गति बनाए रखना भी आवश्‍यक है।
कार्यक्रम के दौरान सभी संबंधित विभागों जैसे श्रम संसाधन विभागए गृह विभाग.सीआईडी ;कमजोर प्रभागद्धए समाज कल्याण विभागए शिक्षा विभागए ग्रामीण विकास विभागए पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा वर्ग कल्याण विभागए अल्पसंख्यक कल्याण विभागए कृषि और पंचायती राज विभाग के पदाधिकारियों ए बाल श्रम के क्षेत्र में काम करने वाली संस्‍थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।