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जमीअत उलमा ए हिंद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दिल्ली में बैठक ——–

जमीअत उलमा ए हिंद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दिल्ली में बैठक ——–

// देश में जारी हिंसा के वातावरण पर रोक लगाने क़े  लिए केंद्र, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन से संपर्क करेगी

/// इस्लामी सहिष्णुता और इस्लामी नैतिकता से गैर मुस्लिमों को परिचित कराने के लिए हिन्दी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में लिटरेचर फ़्राहम किया जाए,

/// बाबरी मस्जिद मामले में अगर किसी समय कोई जरूरत पड़े तो जमीअत उलेमा हिंद हर तरह से सहयोग करेगी

/// असम में  नागरिकता अधिकार समस्या बहुत ही गंभीर रुख अख्तियार कर चुका है, इसलिए जमीअत उलेमा ए हिंद ने फैसला किया कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा पूरी ताकत से लड़ा जाए,

/// जमीअत उलेमा ए हिंद फिलीस्तीन के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के  फॉर्मूला ‘सदी डील ‘ को दरकिनार करते हुए मांग करती है कि जल्द से जल्द फिलिस्तीनियों को अपने क्षेत्र में स्वतंत्र राज्य स्थापित करने का मौक़ा दिया जाये।
/// सऊदी सुधार से संबंधित एक समिति बनाई

/// जमीअत साद साला  समारोह के अवसर पर अकाबिर की सेवाओं पर संगोष्ठी का निर्णय
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नई दिल्ली, 30 जून
जमीअत उलमा ए हिंद की  राष्ट्रीय कार्यकारि की आज मदनी हॉल, १,बहादर शाह जफर मार्ग, नई दिल्ली में मौलाना कारी सैयद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी राष्ट्रपति अध्यक्ष जमीअत उलेमा ए हिंद की अध्यक्षा में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई  जिसमें बाबरी मस्जिद मामले की वर्तमान स्थिति, देश की मौजूदा सांप्रदायिक स्थिति और असम में नागरिकता की गंभीर होती समस्या और फिलिस्तीन में जारी मानवीय संकट जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

जमीअत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कार्यकारिणी की बैठक में देश के मौजूदा हालात पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिसके बाद कार्यकारिणी के सदस्यों ने सर्वसम्मति से वर्तमान स्थिति का मुकाबला करने के लिए सकारात्मक रणनीति अपनाने पर जोर दिया, कार्यकारिणी ने तय किया कि हिंसा को रोकने के लिए केंद्र, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन से संपर्क किया जाये, इसके अलावा कार्यकारिणी ने आपसी घृणा का एक महत्वपूर्ण कारण गलतफहमी मानते हुए उसे ख़त्म करने के लिए इस्लामिक नैतिकता से गैर-मुसलमानों को अवगत कराने हेतु  हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में लिटरेचर फैलाने का ऐलान किया, इसके अलावा फैसला किया गया  कि आपसी घृणा समाप्त करने के लिए सामाजिक सेवाओं पर ध्यान दिया जाएगा ।

बाबरी मस्जिद और असम में  नागरिकता  अधिकार जैसे मुद्दों पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई, बाबरी मस्जिद मामले की मौजूदा स्थिति पर विचार करते हुए  कार्यकारिणी ने फैसला किया कि मामले में अगर किसी समय कोई जरूरत पड़े तो जमीअत उलेमा हिंद हर तरह से सहयोग करेगी। इसके अलावा असम में  नागरिकता अधिकार समस्या बहुत ही गंभीर रुख अख्तियार कर चुका है, इसलिए  जमीअत ने फैसला किया कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा पूरी ताकत से लड़ा जाए.

फ़िलिस्तीन  पर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव में कार्यकारिणी ने यरूशलेम में आधिकारिक अमेरिकी दूतावास की स्थापना  जनमत, संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय नियमों और समझौतों का अपमान करार दिया। इस  संबंध में भारत सरकार के रुख पर संतोष जताते हुए केंद्र सरकार से मांग है कि वह फिलीस्तीनी जनता के वैध अधिकार का हर मोर्चे पर अधिसूचना समर्थन करे, जमीअत उलेमा ए हिंद  ने  फिलीस्तीन के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के  फॉर्मूला ‘सदी डील’ को ख़ारिज करते हुए मांग की कि जल्द से जल्द फिलिस्तीनियों को अपने क्षेत्र में स्वतंत्र राज्य स्थापित करने का मौक़ा दिया जाये। बैठक में और भी मुद्दों पर  तफ्सील से बात चीत हुई ।

बैठक में अध्यक्ष श्री क़े अलावा  मौलाना  महमूद मदनी महासचिव जमीअत  ए उलेमा हिंद, मौलाना हसीब सिद्दीकी, शकील अहमद सय्यद, मौलाना हाफिज पीर शब्बीर अहमद, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सलमान मंसूरपूरी, मौलाना सलमान बिजनौरी, मौलाना रहमतुल्ला मीर कश्मीरी, मौलाना मतीनुल हक ओसामा क़ासमी, मौलाना हाफिज नदीम सिद्दीक़ी, मौलाना मुफ्ती अहमद देओला, मौलाना मुहम्मद कासिम, मौलाना कारी शौकत अली वेट, मौलाना मोहम्मद रफीक गुजरात, मौलाना मुफ्ती जावेद इकबाल, कारी मोहम्मद अमीन, मौलाना डॉक्टर इस्लाम क़ासमी, मौलाना मुफ्ती राशिद आज़मी, डॉक्टर मसूद अहमद आजमी, मौलाना मुहम्मद कलीमुल्लाह ख़ां कासमी , मुफ्ती हबीबुर रहमान, मौलाना सैयद सिराजुद्दीन नदवी अजमेर, मौलाना मोहम्मद आक़िल, मौलाना अली हसन, हाजी मोहम्मद हारून भोपाल, मौलाना नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी, मुफ्ती अब्दुर्रहमान, मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान, डॉक्टर सईदउद्दीन कासमी, मौलाना अब्दुल कादिर असम, मौलाना माज़ुद्दीन अहमद , मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ।