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14 वी पुण्य थिति पर विशेष मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाउँगा बिहार के एकलौते  मुस्लिम मुख्यमंत्री अब्दुल ग़फ़ूर जिन्हें भुला दिया गया।

14 वी पुण्य थिति पर विशेष  मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाउँगा  बिहार के एकलौते  मुस्लिम मुख्यमंत्री अब्दुल ग़फ़ूर जिन्हें भुला दिया गया।

अशरफ अस्थानवी

आज बिहार के एकलौते मुख्यमंत्री अब्दुल ग़फ़ूर साहब की 14 वी पुण्य थिति है आज ही के दिन 10 जुलाई 2004 को वे अपने लाखों प्रशंसकों को मर्माहित कर इस नश्वर जगत को सदा सर्वदा के लिए त्याग कर ईश्वर से जा मिले थे।  इन के निधन से एक युग का अंत हो गया है।  ज़िंदा क़ौमें हमेशा अपने पूर्वजों को याद रखती हैं और उन के पद्चिनोहों पर चल कर भविष्य की राहें तै करती हैं लेकिन दुख का विषय है कि मुस्लिम समुदाय से आने वाले बिहार के इस अनमोल रत्न को लोगों ने भुला दिया।  सरकार इन की जयंती और पुन्यथिति नहीं मनाती न ही सामाजिक संगठनों तथा मुस्लिम संगठनों ने भी इन्हें याद रखने की ज़रूरत महसूस नहीं की।  तभी तो इन के व्यक्तित्व और कीर्तित्व पर सेमिनार और संपोज़ियम नहीं किया जाता नई पीढ़ी तो इन के योगदान और बलिदान से पूर्ण रूप से अनभिज्ञ है।

स्वर्गीय अब्दुल ग़फ़ूर का जन्म 18 मार्च 1918 मे बिहार के गोपालगंज ज़िला के सराए अख़तेयार के एक प्रतिष्ठित परिवार  मे हुवा था इन की प्राथमिक शिक्षा गाँव में हुई उच्य शिक्षा अली गढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय से प्राप्त की। वे  बचपन से ही  सकारात्मक सोच रखते थे तथा अंग्रेज़ शासन के दमन और अतयाचार से वे बहुत दूखी थे। शिक्षा पूर्ण  करने के उपरांत  वे स्वंत्रता संग्राम में कूद पड़े कई बार इन्हें जेल भी जाना पड़ा। वे टु नेशन थेयोरी के कटटर विरोधी थे स्वंत्रता प्राप्ति के बाद वो पूर्ण रूप से राजनीती में कूद पड़े पहली बार 1952 में गोपालगंज के बिरौल विधानसभा से निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे फिर वे बिहार विधान परिषद के सभापति जैसे प्रतिष्ठित पद को सुशोभित करते हुए  2 जुलाई 1973 से 11 अप्रैल 1975 तक बिहार के पहले एक्लौते मुस्लिम मुख्यमंत्री बने ।कई बार लोक सभा के सदस्य निर्वाचित होकर लोक सभा पहुंचे तथा केंद्रीय मंत्री मंडल में नगर विकास मंत्री के पद को भी सुशोभित किया वे बहुत ईमानदार कर्मठ ग़रीबों के हितैषी और निर्भीक राजनेता थे।  इन के ही अनुशंसा पर भारत सरकार ने आकाशवाणी पटना से एक घंटे का उर्दू कार्यक्रम को सुकृति प्रदान की जो यथावत है।

स्वर्गीय  अब्दुल ग़फ़ूर एक ईमानदार राजनेता थे नीतीश कुमार ने राजद से अलग होकर जब नई समता पार्टी बनाई तो पार्टी के गठन में अब्दुल ग़फ़ूर साहब की सक्रीय भूमिका रही तथा वे समता पार्टी के संस्थापक  अध्यक्ष भी रहे । वर्ष  1996 में समता पार्टी कि टिकट पर वो गोपालगंज से संसद निर्वाचित हुवे।  कटिहार मेडिकल कॉलेज की स्थापना में भी इनका सक्रिय सहयोग रहा।

10 जुलाई 2004 को लम्बी बीमारी के बाद राजनीती का गगन का ये  सूर्यअस्त हो गया। इन्हें गोपालगंज के पारिवारिक क़ब्रिस्तान में सपुर्दे ए खाक किया गया।

सामाजिक संगठनों मिल्ली एदारों के लोगों को बिहार के इस महान सपूत के कार्य कलापों तथा राज्य और देश के निर्माण में इन के योगदान और बलिदान से परचित करने के लिए इन के वयक्तित्व पर सेमिनार जरूर करने चाहिए साथ ही साथ इन के नाम से नामित कोई यूनिवर्सिटी म्युज़िअम ज़रूर स्थापित किये जाने चाहिए साथ ही साथ पाठ पुस्तकों में भी इन के संघर्ष पूर्ण जीवन पर आधारित विशेष आलेख जरूर सम्लित किए जाएँ ताकि नई पीढ़ी इस महान नेता को जान सके और इन के पदचिन्हों पर चलकर राज्य और देश की सेवा के भाव को मज़बूती प्रदान कर सके।

सूरज हूँ ज़िन्दगी  की रमक़ छोड़ जाऊँगा

में डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाउँगा।