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प्रोफेसर अमिताभ कुंडू की पुस्तक “विजन-2025” का नई दिल्ली में विमोचन

प्रोफेसर अमिताभ कुंडू की पुस्तक “विजन-2025” का नई दिल्ली में विमोचन

नई दिल्ली। बीते शनिवार की शाम को हिंदुस्तान के मशहूर संगठन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज से निकलने वाली पुस्तक विजन-2025 “सामाजिक आर्थिक असमानताओं को भारतीय आर्थिक विकास को एक समावेशी एजेंडा क्यों चाहिए” का विमोचन जेएनयू में सामाजिक विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर अमिताभ कुंडू के हाथों जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के सीआईटी कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया, इस मौके पर प्रो. कुंडू ने कहा कि हिंदुस्तान में पाये जाने वाली सामाजिक व आर्थिक विषय पर विजन-2025 किताब वक़्त की जरूरत है। इस पुस्तक में समाज के अहम विषयों पर बात की गई है। पूरा डाटा दिया गया है और हिंदुस्तान की सही तस्वीर पेश की गई है जिस पर अमल करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में कई अहम सवाल उठाए गये हैं और उस संदर्भ में जवाब दिया गया है।
प्रो. कुंडू ने आगे कहा कि हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक के मुद्दों पर एक रिपोर्ट पेश की गई है जिसमें बताया के शिक्षा को बीच में खत्म करने वालों में सबसे ज़्यादा मुस्लिम बच्चें हैं, दूसरे कामों में मुस्लिम महिलाओं की मौजूदगी बहुत कम है, साथ ही स्वास्थ और दूसरे जगहों पर मुसलमानों में आई कमी का चर्चा किया गया है।

इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज (IOS) के चेयरमैन डॉक्टर मोहम्मद मंजूर आलम ने कहा कि आज हम 2018 की बात कर रहे हैं तो मेरे जेहन में 1947 की तस्वीर घूम रही है, जब उस वक़्त मुसलमान खौफ के माहौल में था वही माहौल आज भी मुसलमानों में पाया जाता है, उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दों पे जानने समझने का मतलब होता है कि उन मुद्दों को हल करने का आधा काम हो चुका है, डॉ. आलम ने आगे कहा कि 1962, 1965 और 1971 कि जंगों में मुसलमानों की बेमिसाल कुर्बानियां रही हैं, जिस वजह से हिंदुस्तान अंदुरुनी तौर पे मज़बूत हुआ है, मगर आज हमें ही हाशिये पे रख दिया गया है।

चुनाव आयोग के पूर्व प्रमुख एसवाई कुरैशी ने मुसलमानों के खिलाफ दुष्प्रचार पर चर्चा करते हुवे कहा कि हमेशा मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि ये सिर्फ बच्चे पैदा करते हैं और इसमें सबसे आगे हैं, मुस्लिम शिक्षा और दूसरी सहूलियत से उन्हें महरूम रखा जाता है, जबकि यह सरासर गलत बात है। इस मौके पर डॉक्टर मोनित बनर्जी (डायरेक्टर नेशनल फाउंडेशन ऑफ इंडिया), प्रो. नौशाद अली आज़ाद (पूर्व अध्यक्ष विज्ञान विभाग, जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी) प्रो. विजय महाजन,
प्रो. सुदर्शन रामास्वामी (अध्यक्ष ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी), प्रो. जेड एम खान, प्रो. अफजल वाणी आदि ने भी संबोधित किया।