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योन शोषण की घटनाओं से असुरक्षित और आतंकित हैं बेटियां  इस घिर्णित घटना कर्म पर पुरे देश में उबाल की स्थिति

योन शोषण की घटनाओं से असुरक्षित और आतंकित हैं बेटियां  इस घिर्णित घटना कर्म पर पुरे देश में उबाल की स्थिति
अशरफ अस्थानवी
बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह में लड़कियों के यौनाचार मामले में विपक्षियों के निशाने पर रही बिहार की समाज कल्याण विभाग मंत्री मंजू वर्मा ने अनतः कल अपने  पद से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने के बाद मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें ‘टारगेट’ किया गया हालाँकि राज्य के मुख्या और उन की पार्टी के लोगों ने अंतिम समय तक मंत्री का बचाव करते रहे लेकिन जन आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिपणी के बाद मुख्य मंत्री ने मंत्री को उन के पद से इस्तफ़ा देने के लिए कहा। ये भी वास्तविक सत्य है कि मीडिया ने गहरे पड़ताल के बाद मंत्री द्वारा दुष्कर्म कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से 17 बार मंत्री से फ़ोन की पुष्टि हुई है।
इस विषय पर एक महत्वपूर्ण घटना  1963 की है जिसे आज के घ्रणित वातावरण में बयान करना जरुरी है। 1963 में इसी प्रकार की बस्तर में सामूहिक बलत्कार  की घटना घटी थी। संसद में इस पर बहस हो रही थी और पंडित जवाहर लाल नेहरू संसद छोड़कर चले गए थे।
दूसरे दिन संसद परिसर में ही लोहिया जी ने इंदिरा गांधी को चिकोटी काट ली। नेहरू जी  ने जब लोहिया जी से नाराज़गी जताई तो लोहिया ने पलटकर जवाब दिया, ”आपकी बेटी को दर्द हुआ तो फ़ौरन बोल पड़े, कल जब बस्तर की बेटियों के साथ हुए बलात्कार पर बात हो रही थी तो आप संसद छोड़कर क्यों चले गए थे। ” नेहरु ने इस पर कुछ नहीं कहा।
उधर मामला ये था कि प्रधानमंत्री नेहरु उस घटना से इतने व्यथित और शर्मिंदा थे कि ख़ुद को संसद में अपना मूंह दिखाने के क़ाबिल नही मान रहे थे।
अभी हाल ये है कि मुज़फ्फ़रपुर, देवरिया और हरदोई में देश की कमसिन   सी बच्चियों  को हवस का शिकार बनाये  जाने और उनके साथ अमानवीय व्यवहार की घटनाओं पर देश के नेताओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रहे हैं। चूंकि इन घटनाओं में नेताओं को बहुत अधिक पछतावा नहीं है और वे लोग इस बड़ी घटना को भी सामान घटना मान रहे हैं इसलिए वो टी वी और अख़बारों में रोज़ की घटनाओं की तरह इसे देख पढ़कर साइड करते नज़र आ रहे हैं।
कमाल तो ये है कि मुजफ्फरपुर और देवरिया के आरोपियों की  गिरफ्तारी के बाद भी अपनी ठसक दिखाने से बाज़ नही आ रहे हैं। इन घटनाओं पर तो देश को उबल जाना चाहिए लेकिन आम जनता अभी भी ख़ामोश तमाशाई बनी बैठी है।
आम जनता के लिए यह अवसर गुनहगारों को कठोरतम दंड दिलाने के लिए आवाज़ उठाने , व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और मिलजुलकर अपने समाज की बच्चियों को सुरक्षित करने के रास्ते तलाशने का है। और ऐसा पुरे देश में वातावरण स्थपित करना है जिस में हमारी बच्चियां और माँ बहनें सुरक्षित रह सकें।