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बिहार में अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी।  ऐसे स्कूलों पर शिकंजा कसेगी सरकार

बिहार में अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी।  ऐसे स्कूलों पर शिकंजा कसेगी सरकार
अशरफ अस्थानवी
बिहार में सरकारी स्कूलों की स्थिति अच्छी नहीं है इस लिए मजबूर वश बिहार के लोग अपने बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए प्राइवेट स्कूलों में भेजते हैं परन्तु प्राइवेट स्कूलों के मनेजमेंट द्वारा मनमाना फीस वसूला जाता है जिस के कारन बच्चों के अभिभावक परेशान हैं लेकिन अब राज्य वासियों को सरकार से अच्छी खबर प्राप्त हुई है। अब निजी स्कूलों के मनमानी फीस से राज्य वासियों को मुक्ति मिलेगी।
राज्य के निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर अंकुश लागने के लिए राज्य सरकार कानून बनाएगी। बहुत जल्द इसके लिए विधानसभा में बिल पेश होगा। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने  शिक्षक दिवस के मौके पर स्थानीय श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा बहुत अधिक फीस ली जाती है, जिस कारण गरीब के बच्चे उसमें नहीं पढ़ पाते हैं। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि कानून बनाकर निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण करेगी और उसका निर्धारण करेगी। ताकि निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों का शोषण नहीं किया जा सके। गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी और तमिलनाडु आदि राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है।
उन्होंने यह भी कहा कि निजी स्कूल बड़ी संख्या में हैं। उनका भी महत्वपूर्ण योगदान शिक्षा के विकास में है। इस मौके पर उन्होंने 17  शिक्षकों को राज्य पुरस्कार प्रदान किया। अमूमन यह पुरस्कार मुख्यमंत्री के हाथों दिया जाता है, लेकिन अस्वस्थ्त होने के  कारणों से इस साल मुख्यमंत्री समारोह में शामिल नहीं हो सके।
 उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 9वीं से 12वीं में बड़ी संख्या में स्मार्ट क्लासेज की शुरुआत की जाएगी। कक्षा में टीवी स्क्रीन होगा, जिसके माध्यम से बच्चे ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। बांका के डीएम ने कुछ स्कूलों में ऐसी व्यवस्था करायी भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र का निर्माण करते हैं। आज के जमाने में गुगल भी शिक्षक बन गया है। इसके माध्यम से बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में 2003 में शिक्षा मित्र को 1500 मानदेय मिलता था। 2006 में राज्य सरकार ने इन्हें पंचायत शिक्षक बनाया, नयी नियुक्ति भी की और इनका मानदेय पांच हजार किया गया। 2015 में 15 से 17 हजार महीना वेतन हो गया। अब इन शिक्षकों को 22 हजार से 26 हजार
शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा पर सबसे अधिक ध्यान दे रही है। राज्य सरकार अपने बजट का 20 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च करती है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए विश्व बैंक के सहयोग से 2234 करोड़ की योजना बनी है। 846 प्लस टू स्कूलों का निर्माण आधारभूत संरचना विकास निगम द्वारा किया गया है। मौके पर शिक्षक कल्याण कोष में अधिकतम राशि जमा करने वाले प्रथम तीन जिले नालंदा, पटना और पश्चिम चंपारण के डीईओ को सम्मानित किया गया।