Headlines

नीतीश सरकार के एक मात्र अल्पसंकिय मंत्री खुर्शीद , उर्फ़ फ़िरोज़ अहमद ने आत्म विश्ववास से प्राप्त किया लक्ष

नीतीश सरकार के एक मात्र अल्पसंकिय मंत्री खुर्शीद , उर्फ़ फ़िरोज़ अहमद ने आत्म विश्ववास से प्राप्त किया लक्ष

अशरफ अस्थानवी
अगर मनुष्य के अंदर दृढ इक्षा शक्ति हो तो लक्ष की और अवश्य ही अग्रसर होता है इसका जीता जागता उदहारण हैं बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण एवं गन्ना उद्योग मंत्री खुर्शीद अहमद ,जिन्हों ने प्रतिकूल परिस्थति का मुक़ाबला कर एक कृतिमान स्थापित किया है। वे चंपारण के बेतिया जिला के सिकटा के वर्तमान विधायक हैं ।वे दूसरी बार इस क्षेत्र से सफल हो कर विधान सभा पहुंचे हैं और इस समय नितीश मंत्री मण्डल में मंत्री हैं वे अपने कर्तव्य के प्रति वफादारी निभाते हुए , आज जीते जी गरीबों के मसीहा बन गए हैं | हम और आप इसे जिस भी चश्मा से देखें,जो सामने दिख रहा है,जो गरीबों की जुवान बोलती है , यही सच्चाई भी है | मंत्री अपने आलीशान सरकारी सुबिधाओं में कटौती कर ,बंगला परिसर में करीब 200 से 250 जरूरतमंद खास कर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का आश्रय बना दिया है |जहाँ ऐसे जरूरतमंद लोगों के रहने से लेकर भोजन का भी निःशुल्क प्रबंध कर भी कर दिया है | यहाँ आने वाले लोग जाति,धर्म को भूल कर अपने-अपने जरूरतों के हिसाब से यहाँ एक साथ एक रहते हैं |इतना ही नहीं ख़ास कर गरीब लाचार आर्थिक रूप से कमजोर किसी रोगी के पास दवा के लिए अगर पैसे नहीं हों तो उसे भी पैसे देने के वजाय उसे दवा खरीद कर उपलब्ध करा रहे हैं | यहाँ रोगी ही नहीं जगह-जगह से मेडिकल,आईआईटी आदि की तैयारी करने वाले छात्र भी रहे हैं |मंत्री खुर्शीद अलाम अपने विधान-सभा क्षेत्र का ही नहीं, जहाँ से जो भी, पटना जिस काम के लिए आ जाते हैं , उसे भी सारी सुविधा दे रहे हैं | यह कोई एक दिन नहीं, पूरी तरह से यह सब एक सुव्यवस्थित ढंग से चल रहा है |इस के लिए यहाँ भोजन के लिए राशन-पानी,तोशक,तकिया,कम्बल आदि का अलग-अलग स्टोर भी बना हुआ है | सरकारी स्कूलों में जिस तरह प्रतिदिन के लिए मिड डे का मीनू के अनुरूप भोजन बनता है, यहाँ भी प्रति दिन का मीनू बना हुआ है | प्रति दिन, दिन में चावल,दाल,दो सब्जी बदल-बदल कर ,चटनी या चोखा और रात्रि में तीन दिन मांसाहारी भोजन सोमवार को चिकेन या मछली,बुधवार को अंडाकरी, शुक्रवार को मटन और रविवार को पनीर दिया जाता है | यह कोई भी जा कर कभी देख सकते हैं |अगर हम इसे राजनीति चश्मा से ही देखें तो, कितने विधायक या मंत्री के यहाँ यह सुविधा मिल रहा है …? यह यक्ष्य प्रश्न कर रहा हूँ | येसा कहा जाता है कि, जीत के बाद विधायक और मंत्री बनने के बाद सुबिधा देना और उनकी समस्याओं का समाधान करना तो दूर की बात दर्शन दुर्लभ हो जाता है | यहाँ तो प्रतिदिन 200 से 250 लोगों का रहने से लेकर भोजन-पानी ,दवा आदि मिल रहा है | हमारा तो मानना , आज जिस तरह सामाजिक और नैतिक मूल्यों का तेजी से ह्रास हो रहा है, इस बीच मंत्री खुर्शीद अलाम जनसहयोग से जो कुछ भी कर रहे हैं, एक मिशाल है |मंत्री खुर्शीद उर्फ़ फिरोज अहमद ने अपने जीवन के संघर्ष के बारे में बताया कि बचपन में मेरा जन्म एक गरीब किसान के घर हुआ है | हमारे पिता ने परिवार के भरण-पोषण और पढाई-लिखाई के कारण खेती की जमीन के साथ पुश्तैनी जमीन भी बेच दिए | हमलोगों को गाँव के ही एक शेख रहीम के छोटी सी फुंस की झोपड़ी में वर्षों गुजरना पड़ा है | स्कूल की छुट्टी के बाद हमें खेतों में काम करना पड़ता था | ऐसे भी दिन आये जब हम रोटी के लिए रते थे , तो माँ पड़ोसियों के घर से भात मांग कर मुझे खिलाती थी | बरसात के दिनों में कुटा हुआ तीसी का घोरुवा से ही रोटी या भात खाना पड़ता था | चैत-बैशाख में तो कभी-कभी केराव का घुघुनी ही खा के सोना पड़ता था | बावजूद मेरे पिता कहते थे, ईमानदारी और न्याय के रास्ते पर चल कर कभी भी जीवन में बेईमानी और लालच का छाप नहीं पड़ने देना | कभी किसी को ठगना नहीं ठगा जाने में कोई हर्ज नहीं है | समय बीतता गया , कर्म और दृढ विश्वास एवं पिता की प्रेरणा के रास्ते पर चल कर आप सबों के जनसहयोग और आशीर्बाद से यहाँ तक पहुंचा हूँ | आज मलाल बस इस बात का है कि जिस बृक्ष को मेरे पिता ने लगाया था, जब उस में फल लगा तो खा नहीं सके |आज हम गरीब गुरबा, हर वर्ग के लोगों के लिए ,जो कुछ भी कर रहा हूँ, जनसहयोग से ही हो रहा है , इसका मैं सिर्फ एक माध्यम हूँ | जिस के बदौलत यहाँ तक पहुंचा हूँ, उनकी सेवा को हम अपने कर्तव्य और धर्म-कर्म से जोड़ कर देखता हूँ | हर जाति और धर्म के लोग यहाँ सामान विचार के साथ आ कर रहते हैं,यहाँ कोई मानव-मानव में फर्क नहीं है | सभी एक कमरा में साथ रहते हैं और साथ में बैठक कर खाते हैं और जरुरत पड़ने पर एक दूसरे का सहयोग भी करते हैं |