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राष्ट्रकवि दिनकर की स्मृति में 7 दिवसीय रामकथा और  साहित्य महाकुंभ का विराट आयोजन, बिहार का सिमरिया गांव विश्व सम्मलेन का बनेगा साक्षी, और दुनिया को फिर प्रदान करेगा रौशनी।  

राष्ट्रकवि दिनकर की स्मृति में 7 दिवसीय रामकथा और  साहित्य महाकुंभ का विराट आयोजन, बिहार का सिमरिया गांव विश्व सम्मलेन का बनेगा साक्षी, और दुनिया को फिर प्रदान करेगा रौशनी।  
अशरफ अस्थानवी
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की स्मृति में सिमरिया में रामकथा सह साहित्य महाकुंभ का विराट आयोजन किया जा रहा है। 1 दिसंबर से 9 दिसंबर तक चलने वाले समारोह में पूर्वाह्न में सुप्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू द्वारा रामकथा तथा अपराह्न में साहित्य महाकुम्भ का आयोजन किया जा रहा है। साहित्य महाकुम्भ में साहित्य सत्र एवं सांस्कृतिक ओलम्पिक का आयोजन किया जाएगा। साहित्य महाकुंभ में विश्व के 167 देशों के एनआरआई साहित्यकार, पत्रकार और धर्मावलंबी भाग लेंगे। देश भर के धर्म, साहित्य और सांस्कृति से जुड़े लोग इसमें मौजूद रहेंगे। आयोजन में भारतीय संस्कृति पर विश्व के कई देशों के संस्कृति प्रेमी अपनी कला का प्रदर्शन कर अभिराम छटा बिखेरेंगें।
डॉ.कर्ण सिंह आयोजन समिति के अध्य्क्ष हैं.
सिमरिया राम कथा सह साहित्य महाकुंभ आयोजन समिति का अध्यक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री  डॉ.कर्ण सिंह को बनाया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह, बीजेपी सांसद भोला सिंह और जेडीयू के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव केसी त्यागी आयोजन समिति के सदस्य हैं. इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए अमित कुमार रॉय  उर्फ़ गाँधी जी पूर्ण रूप से सक्रीय हैं. वे तमाम धर्म संस्थाओं के महत्वपूर्ण लोगों तथा तमाम भाषा के विद्वानों से सम्पर्क स्थापित कर रहे हैं।
उल्लेखनीय  है कि 3 वर्ष पूर्व बिहार के राजगीर (वीरायतन) में जैन धर्मावलम्बियों द्वारा आयोजित रामकथा के दौरान मोरारी बापू ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली सिमरिया में रामकथा के साथ  साहित्य महाकुंभ करने की इच्छा प्रकट की थी । इस विराट आयोजन का सौभाग्य बिहार मूल के उद्योगपति विपिन ईश्वर को मिला है।  वे इसकी तैयारी में  पूरी तन्मयता से जुटे हुए हैं  ।
सिमरिया में करीब 1 लाख लोगों के रहने ठहरने की व्यस्था के लिए टेंट सिटी का निर्माण किया जा रहा है। जापान और कोरिया की कंपनी टेंट सिटी के निर्माण में लगी है। 6 किलोमीटर में टेंट सिटी बसाया जाएगा।
राम कथा और साहित्य महाकुंभ में करीब 1 करोड़ लोगों के पहुंचने का अनुमान किया  जा रहा है। इसको लेकर 1 करोड़ लोगों के लिए प्रसाद की व्यवस्था की जा रही है। 45 टन घी का प्रबंध किया गया है। प्रसाद जैविक खेती से तैयार किया जाएगा। इसको लेकर मोतीहारी और समस्तीपुर में सैकड़ों एकड़ भूमि में जैविक खेती की जा रही है।
साहित्य महाकुंभ में हिन्दु, मुस्लिम, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के संत और अनुयायी शामिल होंगे। भारत के  राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, देश के सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधि (पंचायत स्तर तक) एवं सभी संवैधानिक पदों पर आसीन गणमान्य व्यक्ति को निमंत्रित किया गया है। देश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति को भी आमंत्रण दिया गया है। विश्व एवं देश के सभी धर्मों के प्रमुख साहित्यकार,कलाकार एवं संस्कृति कर्मी को आमंत्रित किया गया है।
ध्यान रहे कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ बिहार के अनमोल रत्न हैं इनकी जन्मस्थली बेगुसराय का सिमरिया गावं है जहाँ एक दिसम्बर से नौ दिसम्बर तक साहित्य और अध्यात्म का विश्व स्तरीय महाकुम्भ लगने जारहा है | यह इस सदी का सबसे बड़ा महाकुम्भ होगा| रामधारी सिंह ने हिंदी साहित्य में न सिर्फ वीर रस के वाक्य को काव्य को एक नयी ऊंचाई दी, बल्कि अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का भी सृजन किया |
इसकी एक मिसाल 70 के दशक में संपूर्ण क्रांति के दौर में मिलती है | दिल्ली के रामलीला मैदान में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने हजारों लोगों के समक्ष दिनकर की पंक्ति ‘सिंहासन खली करो की जनता आती है’ का उद्घोष करके तत्कालीन सरकार के खिलाफ विद्रोह का शंखनाद किया था |
आज के सन्दर्भ में उनकी कविता की चंद पक्तियां परस्तुत कर रहा हूँ जो आज की सरकार की तानाशाही और जनविरोधी नीतियों की पोल खोलती है |  दिनकर साहब अल्लामा इकबाल और रविन्द्र नाथ टैगोर से बहुत प्रभावित थे
राज क्या बस राजधानी रह गयी है देश में
हर तरफ़ एक खींचातानी रह गयी है देश में
मौत के सौदागरो अब तो बता दो ये हमें
और कितनी ज़ान जानी रह गयी हैं देश में
बढ़ रहे हैं जिस तरह से क़ातिलों के हौसले
ज़ुल्म की केवल कहानी रह गयी है देश में
वो बसाने पर तुले हैं ज़िंदगी आकाश पर
ज़िंदगी लेकिन ज़बानी रह गयी है देश में
आदमी को मार कर मज़हब की रक्षा कीजिए
आस्था कितनी पुरानी रह गयी है देश में
साफ़गोयी छोड़िये मुंह खोलना भी ज़ुर्म है
वोट देकर मुंह की खानी रह गयी है देश में