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गुजरात में पीटे जा रहे हैं बिहारी, क्यों खामोश हैं नीतीश?

गुजरात में पीटे जा रहे हैं बिहारी, क्यों खामोश हैं नीतीश?

 

मामला बिहारी मजदूरों की रोजी-रोटी से जुड़ा है। उनकी अस्मिता का सवाल भी है। उन्हें पूरे गुजरात में गालियां दी जा रही हैं। पीटा जा रहा है। वे जैसे-तैसे जान बचाकर भाग रहे हैं। इतना सब कुछ हो रहा है लेकिन राज्य सरकार के मुखिया के द्वारा कोई चिंता व्यक्त नहीं की जा रही है। क्या यह इस वजह से है कि नीतीश कुमार आज भाजपा के साथ हैं?

क्या वे केवल एनडीए के मुख्यमंत्री हैं, बिहार के नहीं? यह सवाल उनसे जरुर पूछा जाना चाहिए। क्योंकि यदि वे जदयू और भाजपा के बजाय पूरे बिहार के मुख्यमंत्री होते तो उन्हें गुजरात में रोजी-रोटी कमा रहे बिहारी लोगों की चिंता होती। संभव था कि वे गुजरात जाते और वहां के हुक्मरान को ललकारते कि गुजरात भारत का हिस्सा है और भारत का संविधान किसी भी भारतीय नागरिक को कहीं भी काम करने और रहने का अधिकार देता है। गुजरात किसी की बपौती नहीं है।

लेकिन नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं ही नहीं। यह तो साफ हो गया है।

मुझे तो अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हैरानी हो रही है। कैसे वे बिहार में जाकर बिहारियों के आत्मसम्मान की बात करते थे। कहते थे कि बिहारियों ने गुजरात को बनाया है। वे खामोश क्यों हैं? क्यों नहीं देश के नाम एक संबोधन करते हैं जैसा कि वे रेडियो पर अपने मन की बात से देश को परिचित कराते हैं। क्या गुजरात केवल उनका है?

मैं केंद्र, गुजरात और बिहार सरकारों को चुनौती देता हूं कि वे गुजरात में बिहारी भाईयों पर जुल्म को रोकें। नहीं तो बिहार में किसी भी गुजराती को घुसने नहीं दिया जाएगा। फिर चाहे वह गुजरात का कोई आम आदमी हो या फिर देश का प्रधानमंत्री ही क्यों न हो।

परवेज हसन (दानिश )
पूर्व प्रत्याशी बिस्फी विधानसभा