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सफ़रुल मुज़फ़्फ़र का महीना इस्लाम की नज़र में

सफ़रुल मुज़फ़्फ़र  का महीना इस्लाम की नज़र में

सफ़रुल मुज़फ़्फ़रष् हिजरी कैलंडर का दूसरा महीना हैए जो श्मुह़र्रमुलह़रामश् के बाद और ष्रबीउलअव्वलष् से पहले आता हैए इस महीने में सामान्य रूप से ही इबादत की जाती हैए यानि कोई ख़ास ;विशेषद्ध इबादत महीने में मसनून या मुस्तह़ब ;अनुशंसितद्ध नहीं हैए तथा ये दूसरों महीनों की तरह ही हैए यानि ख़ासतौर ;विशेषकरद्ध इस महीने में आपदा ;तबाहीद्ध और मुसीबतों के नाज़िल होने ;उतरनेद्ध का अक़ीदा रखना ग़लत हैए जाहिलियत ;अज्ञानताद्ध के दौर ;अतीतद्ध में इस महीने को अशुभ ;मनह़ूसद्ध महीना समझा जाता थाए इसीलिए वह इस महीने में सफ़र करने से बचते थेए अफ़सोस ;दुर्भाग्यद्ध की बात यह है कि जाहिलियत ;अज्ञानताद्ध के दौर ;अतीतद्ध का ग़लत और भ्रष्ट अक़ीदा सोशल मीडिया पर हमारे ही दीनी भाइयों की तरफ़ से शेयर किया जा रहा हैए सोशल मीडिया के जहाँ बहुत से फ़ायदें हैं वहीं नुक़सान भी बहुत हैंए इनमें से एक यह है कि लोगों की अधिकांश संख्या संदेश ;मेसेजद्ध को बिना पढ़े और बिना तहक़ीक़ किए दूसरों को भेज देते हैंए इन संदेशों ;मेसेजोंद्ध में कभी कभी नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ़ ऐसी बात मनसूब होती हैए जो नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ज़िंदगी ;जीवन भरद्ध में कभी भी नहीं कहीए ह़ालांकि इस पर सख़्त ;कठोरद्ध चेतावनियां अह़ादीस़ में आई हैंए जैसा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायारू श्जो शख़्स़ ;व्यक्तिद्ध मेरी निसबत वह बात बयान करे जो मैंने नहीं कही तो वह अपना ठिकाना ;स्थानद्ध दोज़ख़ ;नरकद्ध में बनाएश् ;बुख़ारीद्धए नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का यह फ़रमान मुख्तलिफ़ ;विभिन्नद्ध अल्फ़ाज़ ;शब्दोंद्ध के साथ ह़दीस़ की कई किताबों में उल्लेख ;वर्णनद्ध हैए जिससे मालूम हुआ कि नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कई बार ऐसा करने से सख़्ती के साथ मना किया हैए तो नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ़ मनसूब की हुई कोई भी बात बिना किसी तहक़ीक़ के आगे न भेजेंए इसी तरह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फ़रमान हैरू श्आदमी के झूठा होने के लिए है कि वह हर सुनी सुनाई बात बिना तहक़ीक़ के बयान करेश् ;मुस्लिमद्धए एक दूसरी ह़दीस़ में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायारू श्जिसने मेरी तरफ़ मंसूब करके जानबूझ कर कोई झूठी ह़दीस़ बयान की तो वह झूठ बोलने वालों में से एक हैश् ;मुस्लिमद्धण्

नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने श्स़फ़रश् के बारे में इस बातिल ;अमान्यद्ध अक़ीदे का इंकार आज से 1400 साल पहले ही कर दिया थाए इसीलिए ह़दीस़ की सबसे प्रामाणिक ;भरोसेमंदद्ध किताब में उल्लेख ;वारिदद्ध है कि ह़ुज़ूर.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायारू श्सफ़रश् का महिने ;में अशुभ ;नह़ूसतद्ध होने का अक़ीदाद्ध बे हक़ीक़त बात हैश् ;बुख़ारीद्धए अशुभ ;नह़ूसतद्ध तो असल में इन्सान के अमल ;कार्यद्ध में होती है कि वह ख़ालिक़.ए.काएनात ;दुनिया को पैदा करने वालेद्ध के ह़ुक्म ;आदेशद्ध की उल्लंघन ;ख़िलाफ़ वर्ज़ीद्ध करता हैए ह़ालांकि वह अपने वुजूद और बक़ा ;बाक़ी रहनेद्ध के लिए भी अल्लाह तआला के ह़ुक्म ;आदेशद्ध की आवश्यकता हैए और एक दिन ऐसा ज़रूर आएगा कि वह भी मौत का मज़ा ;स्वादद्ध चख़ लेगा और इसके बाद इन्सान को अपनी ज़िन्दगी के एक एक लम्हा ;पलद्ध का हिसाब अल्लाह तआला को देना होगाए इन्सान की ज़िन्दगी का जो वक़्त ;समयद्ध भी अल्लाह तआला की नाराज़गी ;अप्रसन्नताद्ध में बिताया हक़ीक़त ;वास्तवद्ध में वह मनहूस है न कि कोई महीना या दिनए तो जो इन्सान श्स़फ़रश् के महीने में अच्छे काम ;कार्यद्ध करेगा तो यही महीना उसके लिए ख़ैर.व.बरकत और सफलता का कारण ;सबबद्ध बनेगा और इन्सान जिन वक़्तों और महीनों में भी बुरे काम करेगा ज़िन्दगी ;जीवनद्ध के वह पल उसके लिए मनहूस होंगेए जैसे कि श्फ़जरश् की नमाज़ के वक़्त ;समयद्ध कुछ लोग उठ कर नमाज़ पढ़ते हैं और कुछ लोग बिना तर्क ;कारणद्ध बिस्तर पर पड़े रहते हैं और नमाज़ नहीं पढ़तेए तो एक ही वक़्त ;समयद्ध कुछ लोगों के लिए बरकत और कामयाबी ;सफलताद्ध का ज़रिया ;कारणद्ध बनाए और दूसरों के लिए नहूसत काए मालूम हुआ कि किसी वक़्त या महीने में नहूसत नहीं होतीए बल्कि हमारे अमल ;कार्यद्ध में बरकत या नहूसत होती हैए ह़दीस़.ए.क़ुदसी में अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता हैरू श्आदम की औलाद ज़माने को गाली देती है और ज़माना को बुरा भला कहती हैए ह़ालांकि ज़माना तो मैं हूँए रात की गर्दिश ;गतिविधिद्ध मेरे हाथ में हैए ;बुख़ारीद्ध यानी कुछ लोग ज़माने के संकटों से प्रभावित ;मुताअस्सिरद्ध होकर ज़माने को बुरा भला कहने लगते हैंए ह़ालांकि ज़माना कोई काम नहीं करताए बल्कि ज़माने में घटनाएँ और संकट सामने आते हैंए वह अल्लाह तआला की मर्ज़ी और उसके ह़ुक्म ;आदेशद्ध से होते हैंण्

बहरह़ाल क़ुरान करीम की किसी भी आयत या नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के किसी भी फ़रमान में यह उल्लेख ;मज़कूरद्ध नहीं हैए कि श्स़फ़रश् के महीने में नहूसत हैए या इस महीने में मुसीबतें ;संकटद्ध और आफ़तें नाज़िल ;उतरतीद्ध हैंए इसी वजह से पूरी उम्मत.ए.मुस्लिमा का इत्तिफ़ाक़ है कि श्स़फ़रश् का महीना अन्य ;दूसरेद्ध महीनों की तरह हैए यानि इस महीने में कोई नहूसत नहीं हैए सीरत.ए.नबवी की कई घटनाएंए कुछ सहाबियात की शादियाँ और कई सहाबियों का इस्लाम क़ुबूल करना इसी महीने में हुआ है और अक़ल ;बुद्धिद्ध से भी सोचें कि महिनाए ज़माना या वक़्त ;समयद्ध कैसे और क्यूँ मनहूस ;अशुभद्ध हो सकता हैघ् बल्कि श्स़फ़रश् के महीने में तो अशुभ ;नहूसतद्ध का शक ;शंकाद्ध भी नहीं करना चाहिएए क्यूंकि इसका नाम ष्स़फ़रुल मुज़फ़्फ़रष् हैए जिसका अर्थ ही श्कामयाबी ;सफलताद्ध का महीनाश् हैंए जिस महीने के नाम में ही खैर ;भलाईद्ध और कामयाबी ;सफलताद्ध का अर्थ होए वह कैसे अशुभ ;नहूसतद्ध का महीना हो सकता हैघ् कुछ लोग यह समझकर कि श्स़फ़रश् के शुरू के 13 ;तेरहद्ध दिनों में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बीमार हुए थेए शादी वग़ैरह नहीं करते हैंए बिलकुल ग़लत हैए क्यूँकी क़ुरान व ह़दीस़ में इस तरह की कोई भी शिक्षा मौजूद नहीं हैए तथा तहक़ीक़ी बात यह है कि नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम श्स़फ़रश् के शुरू दिनों में नहीं बल्कि श्स़फ़रश् के महीने के आख़िरी ;अंतिमद्ध दिनों में या ष्रबीउलअव्वलष् के शुरू के दिनों में बीमार हुए थे और ष्रबीउलअव्वलष् की बारह ;12द्ध तारीख़ को आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफ़ात हुई थीण्

कुछ नावाक़िफ़ ;अनभिज्ञद्ध लोग श्स़फ़रश् के महीने के आख़िरी ;अंतिमद्ध बुध को ख़ुशी मनाते हैं और मिठाई आदि बांटते हैंए जबकि इसकी शरियत.ए.इस्लामिया में कोई ह़क़ीक़त नहीं हैए क्यूँकि लोगों में यह बात ग़लत मशहूर ;प्रसिद्धद्ध हो गई हैए कि इस दिन नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ठीक ;सेह़तयाबद्ध हो गए थेए ह़ालांकि यह बिलकुल ग़लत हैए बल्कि कुछ रिवायात में इस दिन में ह़ुज़ूर.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीमारी के बढ़ जाने का ज़िक्र ;उल्लेखद्ध मिलता हैए तो श्स़फ़रश् के महीने का आख़िरी ;अंतिमद्ध बुध मुसलमानों के लिए ख़ुशी का दिन बिलकुल नहीं हो सकताए यहूद व नसारा ख़ुश हो सकते हैंए हो सकता है यह बात उन्हीं की तरफ़ से फैलाई गई होए पूरी दुनिया के मुसलमानों की तरह उपमहाद्वीप के सभी मकातिब.ए.फ़िक्र का भी यही नज़रिया ;विचारद्ध है कि श्स़फ़रश् के महीने में कोई नहूसत नहीं हैए इसमें शादी वग़ैरह बिलकुल की जा सकती हैए और श्स़फ़रश् के महीने के आख़िरी ;अंतिमद्ध बुध में ख़ुशी का कोई जश्न मनाना दीन नहींए बल्कि नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षा के ख़िलाफ़ ;विपरितद्ध हैण्
इन दिनों सोशल मीडिया पर किसी भी पैग़ाम ;संदेशद्ध को आगे भेजने का सिलसिला बहुत तेज़ी से जारी हैए चाहे हम इस पैग़ाम ;संदेशद्ध को पढ़ने की तकलीफ़ गवारा करें या न करें और इसी तरह इसकी तह़क़ीक़ ;जाँचद्ध करने की ज़रुरत ;आवश्यकताद्ध भी समझें या न समझें कि मैसेज ;संदेशद्ध स़ह़ीह़ जानकारी ;सूचनाद्ध पर शामिल है या झूठ के पुलंदों परए ह़ालांकि इसको आगे भेजने में बहुत ज़्यादा जल्दबाजी से काम लिया जाता हैए जबकि मैसेज ;पैग़ामद्ध आगे भेजने के लिए नहीं बल्कि वास्तव ;हक़ीक़तद्ध में पढ़ने के लिए भेजा गया थाए ग़लत जानकारी ;सूचनाद्ध पर शामिल मैसेज ;संदेशद्ध को आगे भेजना हमारे लिए जाईज़ ;वैधद्ध नहींए ख़ासकर अगर वह पैग़ाम ;संदेशद्ध दीनी तथ्यों ;मालूमातद्ध पर शामिल होए क्यूँकि इससे ग़लत जानकारी ;मालूमातद्ध दूसरों तक पहुंचेगीए जैसे कि कभी कभी सोशल मीडिया के ज़रिए पैग़ाम ;संदेशद्ध पहुँचता है कि अल्लाह तआला के 5 नाम किसी भी मुसलमान को भेज दें तो बड़ी से बड़ी परेशानी हल हो जाएगी इसी तरह कोई पैग़ाम ;पोस्टद्ध इतने दोस्तों को भेज दें तो इस से वह वह समस्याएँ दूर हो जाएँगीए परन्तु समस्याएँ और ज़्यादा पैदा होंगीए इसी तरह कभी कभी सोशल मीडिया पर मैसेज नज़र आता है कि यह पैग़ाम ;संदेशद्ध इतने लोगों को भेजने पर जन्नत मिलेगीए कभी कभी लिखा होता है कि अल्लाह और उसके रसूल से सच्ची मुहब्बत की करने वाला ही इस मेसेज ;संदेशद्ध को फॉरवर्ड ;आगेद्ध नहीं करेगा आदिए इस तरह के पैग़ाम ;संदेशद्ध का शरियत.ए.इस्लामिया से कोई संबंध ;नाताद्ध नहीं हैए बल्कि यह आम तौर पर झूठ और धोखाधड़ी पर शामिल होते हैंण्

मौजूदा दौर में शिक्षा ;पढ़ने और पढ़ानेद्ध और जानकारी प्राप्त करने के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल ;उपयोगद्ध किया जा रहा हैए यह भी अल्लाह की एक दान ;उपहारद्ध है अगर इसका सही ढंग से उपयोग किया जाएए मगर कुछ लोग कुछ पैग़ाम की चमक दमक देख कर उसको बिना पढ़े या बिना तह़क़ीक़ ;जांचेद्ध दूसरों को फॉरवर्ड ;भेजद्ध देते हैंए अब अगर ग़लत जानकारी पर शामिल कोई पैग़ाम फॉरवर्ड ;आगेद्ध भेजा गया तो वह ग़लत जानकारी हज़ारों लोगों में फैल जाएगीए जिसका गुनाह हर उस शख़्स़ ;व्यक्तिद्ध पर होगा जो इसका कारण ;सबबद्ध बन रहा हैए तो बिना जांचे कोई भी पैग़ाम विशेषकर दीनी सूचना के बारे में फॉरवर्ड ;आगेद्ध न भेजेंए जैसा कि अह़ादीस़.ए.रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की रौशनी में बताया गया हैए याद रखें कि इन्सान के मुहं से जो बात निकलती है या वह लिखता हैए तो वह बात उसके नामा.ए.आमाल में लिखी जाती हैए जैसा कि अल्लाह तआला का इरशाद हैरू श्इन्सान मुंह से जो लफ्ज़ ;शब्दद्ध भी निकालता हैए उसके पास निगहबान ;फ़रिश्ते उसे लिखने के लिएद्ध तैयार रहते हैंश् ;सुरह क़ाफ़रू 18द्धण्

इस्लामी तारीख़ ;इतिहासद्ध गवाह है कि ग़लत ख़बरों के फैलने की वजह से इस्लाम और मुसलमानों को बहुत नुक़सान हुआ हैए जैसे कि श्ग़ज़वा.ए.उहदश् के मौक़े पर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के क़त्ल होने की ग़लत ख़बर उड़ा दी गई थी जिसकी वजह से मुसलमानों के पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गई थीए जिसका नतीजा ;परिणामद्ध तारीख़ की किताबों में मौजूद हैए इसी तरह श्ग़ज़वा.ए.बनू मुस्तालिक़श् के मौक़े पर मुनाफ़िक़ीन ने ह़ज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा पर इल्ज़ाम ;दोषद्ध लगा कर ग़लत ख़बर फैलाई थी जिस से नबी.ए.अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शख्सियत ;व्यक्तित्वद्ध भी प्रभावित हुई थीए शुरू में यह ख़बर मुनाफ़िक़ीन ने उड़ाई थी परन्तु बाद में कुछ मुसलमान भी अपनी अज्ञानता ;बेख़बरीद्ध के कारण इसमें शामिल हो गए थेए आख़िर में अल्लाह तआला ने अपने पाक ;पवित्रद्ध कलाम में ह़ज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा की बराअत ;मुक्तिद्ध नाज़िल फरमाईए और इस घटना में अल्लाह तआला ने झूठी ख़बर फैलाने वालों की निंदा कीए जिन्होंने ऐसी ख़बर को फैलाया कि जिसके कारण ह़ज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा के दामन.ए.इफ़्फ़त व इज़्ज़त को दाग़दार करने की शर्मनाक कोशिश की गई थीए बारी तआला का इरशाद हैरू श्उनमें से हर एक शख़्स़ ;व्यक्तिद्ध पर इतना गुनाह है जितना उसने कमाया हैए और उनमें से जिसने इसके बहुत बड़े हिस्से को सरअंजाम दिया हैए उसके लिए अज़ाब भी बहुत बड़ा हैश्ए ;सुरह अल.नूररू 11द्धण्

इसी तरह आज कुछ वेबसाइटस इस्लाम के बारे में विभिन्न विषयों पर जनमत संग्रह ;राय तलबीद्ध कराती रहती हैंए इन रेफिरेंडम ;जनमत संग्रहद्ध में हमारे कुछ भाई बहुत जज़बात ;भावनाओंद्ध के साथ भाग लेते हैंए और अपनी क्षमताओं ;सलाहियतोंद्ध का एक हिस्सा इसमें लगा देते हैंए आम तौर पर इस तरह की सभी वेबसाइटस इस्लाम के ख़िलाफ़ ;विरुद्धद्ध साज़िश ;षड़यंत्रद्ध करने के लिए ही इस्तेमाल की जाती हैंए इन पर कोई ध्यान नहीं देना चाहिएए जैसा कि अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमायारू श्ऐ ईमान वालों! अगर तुम्हें कोई फ़ासिक़ ख़बर दे तो तुम उसकी अच्छी तरह तह़क़ीक़;छान बीनद्ध कर लिया करोए ऐसा न हो कि नादानी ;अनजानेद्ध में किसी क़ौम को तकलीफ़ पहुँचा दोए फिर अपने किये पर पछताओश् ;सुरह अल.हुजुरातरू 6द्धए तथा अल्लाह तआला ने ने इरशाद फ़रमायारू श्जो लोग मुसलमानों में बेहयाई फैलाने की चाहत में रहते हैं उनके लिए दुनिया व आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है श्सुरह अल.नूररू 19द्धण्

ख़ुलासा.ए.कलाम ;सारांशद्धरू सोशल मीडिया को हमें अपने व्यक्तिगतए शिक्षितए सामाजिक व व्यावसायिक ;तिजारतीद्ध पोस्टों के साथ साथ ज़्यादा से ज़्यादा दीन.ए.इस्लाम की तबलीग़ और उलूम.ए.नुबुव्वत को फैलाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिएए क्यूंकि मौजूदा दौर में यही एक ऐसा मीडिया है जिसके ज़रिए हम अपनी बात दूसरों तक आसानी के साथ पहुँचा सकते हैंए वरना इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया तो आम तौर पर मुस्लिम मुख़ालिफ़ ;विरुद्धद्ध ताक़तों के पास हैए तथा अगर स़ह़ीह़ दीनी मालूमात ;जानकारीद्ध पर शामिल कोई पैग़ाम भरोसेमंद ;प्रामाणिकद्ध सूत्रों के ज़रिए से आप तक पहुँचे तो आप इस पैग़ाम ;संदेशद्ध को पढ़ें भीए तथा अपनी क्षमता ;क़ुदरतद्ध के अनुसार अधिक से अधिक लोगों को भी फॉरवर्ड ;भेजेंद्ध करेंए ताकि इस्लाम और उसके तमाम उलूम की ज़्यादा से ज़्यादा इशाअत ;प्रकाशितद्ध हो सकेए लेकिन अगर आपके पास कोई पैग़ाम ग़ैरभरोसेमंद ;ग़लत सूत्रोंद्ध के ज़रिए से आप तक पहुँचे तो आप इस पैग़ाम ;संदेशद्ध को बिना तह़क़ीक़ ;छान बीनद्ध किए बिलकुल फॉरवर्ड न करेंए श्स़फ़रश् के महीने के अशुभ ;मनहूसद्ध होने या इस में मुसीबतें और आपदा के उतरने के बारे में कोई एक रिवायत भी मौजूद नहीं है और न ही आज तक किसी भरोसेमंद आलिम.ए.दीन ने इस को माना हैए तो इस तरह के पैग़ाम ;संदेशद्ध को बिलकुल भी दूसरों को न भेजेंए बल्कि उन्हें तुरंत डिलीट कर देंण्
डॉ॰ मुहम्मद नजीब क़ासमी संभली
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